दुश्मन भी पैश आए हैं ,दिलदार की तरह
नफरत मिली है उनसे , मुझे प्यार की तरह !!
कैसे मिलेंगे चाहने वाले बताइए , दुनिया खड़ी है सामने दीवार की तरह !
वो बेवफाई करके भी शर्मिंदा न हुए ,बदनाम हम हुए हैं गुनेहगार की तरह !
नफरत मिली है उनसे , मुझे प्यार की तरह !!
कैसे मिलेंगे चाहने वाले बताइए , दुनिया खड़ी है सामने दीवार की तरह !
वो बेवफाई करके भी शर्मिंदा न हुए ,बदनाम हम हुए हैं गुनेहगार की तरह !
तूफाँ में मुझको छोडके वो लोग चल दिए , भाई थे मेरे भाई जो पतवार की तरह !
क्यों कर करेंगे वो रिश्तों भरोसा , दुनिया है जिनके वास्ते दीवार की तरह !
चेहरे पे हादसों से लिखी वो इबारतें , पढने लगे है सब मुझे अखबार की तरह !
कातिल भी हो गए है मसीहा मेरे "छबि", मिलते हैं टूट कर वो गले यार की तरह !----सी.एल.सोनी"छबि"