रविवार, 16 अगस्त 2026

तूफाँ में मुझको छोडके........

दुश्मन भी पैश आए हैं ,दिलदार की तरह

नफरत मिली है उनसे , मुझे प्यार की तरह !!

कैसे मिलेंगे चाहने वाले बताइए , दुनिया खड़ी है सामने दीवार की तरह !

वो बेवफाई करके भी शर्मिंदा न हुए ,बदनाम हम हुए हैं गुनेहगार की तरह !


तूफाँ में मुझको छोडके वो लोग चल दिए , भाई थे मेरे भाई जो पतवार की तरह !


क्यों कर करेंगे वो रिश्तों भरोसा , दुनिया है जिनके वास्ते दीवार की तरह !


चेहरे पे हादसों से लिखी वो इबारतें , पढने लगे है सब मुझे अखबार की तरह !


कातिल भी हो गए है मसीहा मेरे "छबि", मिलते हैं टूट कर वो गले यार की तरह !----सी.एल.सोनी"छबि"

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